सिंहस्थ में बता दिया था आएगा आंधी तूफान, अब पुलिस महकमे में मचा दिया तूफ़ान

अपनी नौकरी पूरी होने के साढ़े चार साल पहले इंदौर डीसीपी की नौकरी छोड़ने वाले सुनील मेहता को कहां से मिली ’संजीवनी’ …क्या गीता का ज्ञान उन्हें देता है ऊर्जा, अब कहां रहेंगे?
आज के जमाने में इंदौर डीसीपी की नौकरी करने के लिए कोई कुछ भी कर सकता है, आसमान से तारे भी तोड़कर ला सकता है, लेकिन 28 साल तक पुलिस विभाग में विभिन्न पदों से तरक्की कर इंदौर डीसीपी के बड़े पद पर पहुंचे सुनील मेहता महज चार माह ही इस कुर्सी पर बैठे और अपनी इच्छा से नौकरी को छोड़ दिया। 31 अगस्त को उन्हें वीआरएस यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मिल गई। अब वे इंदौर में अपने सपनों की दुनिया को विस्तार देने की तैयारी कर रहे हैं। वे उज्जैन में एसपी इंटेलिजेंस रहे और सिंहस्थ में सरकार को अलर्ट कर दिया था कि सिंहस्थ में आंधी तूफान आने वाला है। अपने वीआरएस से पुलिस महकमे में सवालों का आंधी तूफान लाने वाले पुलिस अफसर की पढ़िए रोचक कहानी
मूलतः उज्जैन के रहने वाले सुनील मेहता का जन्म तो शाजापुर के बोलाई में हुआ था, लेकिन शिक्षा के माध्यम से वे प्रदेश के कई शहरों से जुड़े रहे। वे इन दिनों प्रदेश के पूरे पुलिस महकमे में सुर्खी बने हुए हैं, इस सवाल को लेकर कि उनकी नौकरी के अभी साढ़े चार साल बचे थे फिर उन्होंने क्यों वीआरएस क्यों ले लिया? हालांकि मेहता यही कह रहे हैं कि अपने परिवार के साथ जिंदगी जीना चाहते हैं, लेकिन यह बात अभी तक अफसरों और पुलिस कर्मियों के गले नीचे नहीं उतर रही। वजह साफ है वे 28 साल से पुलिस विभाग में इससे छोटे पदों पर रहे और डटे रहे। अभी नौकरी के साढ़े चार साल बाकी थे फिर भी वीआरएस के लिए कदम बढ़ा दिया और विचलित नहीं हुए। हिम्मत की ये संजीवनी वे कहां से लाए , ये सवाल भी बना हुआ है। पुलिस अफसरों को उनके जवाब मिले या न मिले, लेकिन मेहता ने newjline.com से साफ कहा सेल्फ लाइफ़ और सेल्फ डिसीज़न है। अब अपने हिसाब से जिंदगी जीना है। इसीलिए उज्जैन से गहरा नाता होने के बाद भी इंदौर को रहने के लिए चुना है। यहां अपने सपनों को एक नई उड़ान दे सकता हूं। उज्जैन है कितनी दूर, आधे एक घंटे में जा सकता हूं। 2015 से 2023 तक 8 साल वे उज्जैन में एसपी इंटेलिजेंस के पद पर रहे। उन्होंने बताया सिंहस्थ में सरकार को पहले ही बता दिया था कि उज्जैन में 4 से 7 मई 2016 के बीच आंधी तूफान आ सकता है। 5 और 6 मई 2016 को आंधी तूफान आया भी और उसने भारी तबाही मचाई थी। मेहता ने बताया इंटेलिजेंस का मतलब सरकार को प्राकृतिक आपदा से भी अलर्ट किया जा सकता है। केवल तकनीकी सूचना तक सीमित नहीं रहा जा सकता। इंदौर में रहते हुए उन्होंने सिमी नेटवर्क को ध्वस्त करने में भी बड़ी अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें इंडियन पुलिस अवॉर्ड से 2023 में सम्मानित किया गया था। बचपन में उन्होंने रणजीत हनुमान मंदिर के पास अपने परिवार के साथ काफी वक्त बिताया। खास बात यह कि उनकी शिक्षा कई शहरों में हुई, क्योंकि पिता का ट्रांसफर हो जाता था तो दूसरी जगह पढ़ने जाना। पड़ता था। शाजापुर, उज्जैन, इंदौर और दतिया में भी पढ़े और भोपाल से ग्रेजुएशन किया।
कम खर्चों में काम कर लूंगा…

डीसीपी से वीआरएस मिलने के बाद वे इंदौर के विस्तारा में रह रहे हैं। उन्होंने कहा वीआरएस सोच समझ कर ही लिया है। 1 जून 2026 को आवेदन कर दिया था और मंजूरी मिलने के बाद 31 अगस्त 2026 को उन्हें रिटायरमेंट मिल गया। एक बेटा है और एक बेटी जो जयपुर में पढ़ाई कर रही है। इस छोटे से परिवार के साथ वे अब अपनी लाइफ को एक नई दिशा देने की कोशिश में जुट गए हैं। उन्होंने कहा ये सही है कि अब उतना पैसा हाथ में नहीं आएगा लेकिन खर्चों को कम कर लूंगा। गीता का ज्ञान मुझे हर परिस्थिति में हिम्मत और ऊर्जा देता है। गीता का ज्ञान उन्हें रामसुखदास जी की ‘साधक संजीवनी’ से मिला और आज भी समय मिलने पर इसे पढ़ते हैं। जब नौकरी में थे तब कार में ही लैपटॉप खोलकर उसे पढ़ते अवश्य थे। मेहता कहते हैं जीवन में गीता के ज्ञान का आधार जरूरी है।

जिंदगी एक सफर है सुहानाफिल्म का यह गीत सुनील मेहता की लाइफ़ में भी गुनगुनाता रहा। 1998 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारी। के रूप में अपना सफर शुरू करने वाले मेहता पदोन्नति के माध्यम से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए। वर्ष 2016 बैच के प्रमोटी आईपीएस अधिकारी बने और इंदौर में एडिशनल एसपी (ट्रैफिक) के रूप में सेवाएं दीं।सिवनी जिले में पुलिस अधीक्षक रहे और इंदौर में एसपी ग्रामीण भी रहे। मई 2026 में इंदौर जोन-4 के डीसीपी नियुक्त हुए। वे कहते हैं मैं अपने फैसले से खुश हूं…।