जहां कृष्ण ने सीखा ज्ञान, वहीं से शुरू होगा श्रीकृष्ण पर्व

* सांदीपनि आश्रम से गूंजेगा कृष्ण-भाव, 2 से 6 सितंबर तक उज्जैन-महिदपुर के पांच प्रमुख स्थलों पर होंगे सांस्कृतिक आयोजन
जहां कभी भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी, वहीं से इस बार ‘श्रीकृष्ण पर्व’ की सांस्कृतिक यात्रा शुरू होगी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर संस्कृति विभाग द्वारा 2 से 6 सितंबर तक उज्जैन और महिदपुर क्षेत्र के पांच प्रमुख स्थलों पर भव्य सांस्कृतिक आयोजन किए जा रहे हैं। इन पांच दिनों में कृष्ण की शिक्षा, मित्रता, बाल लीलाओं, भक्ति और गीता के उपदेश की झलक नृत्य, लोकगायन, भक्ति संगीत और रासलीला के माध्यम से देखने को मिलेगी।
खास बात यह है कि आयोजन के लिए उन्हीं स्थानों को चुना गया है, जिनका संबंध भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उज्जैन की सांस्कृतिक परंपरा से रहा है। सांदीपनि आश्रम में ज्ञान और गुरु-शिष्य परंपरा, नारायणा में कृष्ण-सुदामा की मित्रता और प्राचीन कृष्ण मंदिरों में भक्ति का भाव सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए जीवंत किया जाएगा। सभी कार्यक्रमों में प्रवेश नि:शुल्क रहेगा।
सांदीपनि आश्रम में कृष्ण की शिक्षा की कहानी
श्रीकृष्ण पर्व की शुरुआत सांदीपनि आश्रम से होगी। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने की स्मृति से जुड़े इस स्थल पर 2 से 4 सितंबर तक शाम 4 बजे से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी।
2 सितंबर को डॉ. लता सिंह मुंशी एवं साथी, भोपाल द्वारा ‘कर्मती इति कृष्ण’ नृत्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसके साथ चरणजीत सिंह सौंधी एवं साथी, मुंबई भक्ति गायन करेंगे।
3 सितंबर को अनुराधा त्रिपाठी एवं साथी, भोपाल बघेली लोकगायन और अखिलेश तिवारी एवं साथी, भोपाल भक्ति गायन प्रस्तुत करेंगे।
4 सितंबर को गीता पिलई एवं साथी, इंदौर की नृत्य नाटिका और श्रुति द्विवेदी एवं साथी, मुंबई का भक्ति गायन होगा।
नारायणा में गूंजेगी कृष्ण-सुदामा की दोस्ती
महिदपुर क्षेत्र का नारायणा धाम भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की भावपूर्ण स्मृति से जुड़ा है। यहां 2 से 6 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे सांस्कृतिक आयोजन होंगे।
2 सितंबर को कृष्ण-सुदामा केंद्रित नृत्य नाटिका, भक्ति गायन और कृष्ण की दान लीला की रासलीला होगी।
3 सितंबर को कृष्ण केंद्रित नृत्य नाटिका, भक्ति गायन और माखन चोरी की रासलीला प्रस्तुत की जाएगी।
4 सितंबर को कृष्ण जन्म एवं बाल लीला मंच पर जीवंत होगी।
5 सितंबर को कृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग पर नृत्य नाट्य और भक्ति गायन होगा।
6 सितंबर को गीता उपदेश पर आधारित नृत्य नाट्य और भक्ति गायन के साथ आयोजन का समापन होगा।
रामलीला चौक में लोकधुनों पर कृष्ण भक्ति
महिदपुर के रामलीला चौक में 2 से 4 सितंबर तक शाम 7 बजे तीन दिवसीय आयोजन होगा। राधा-कृष्ण प्रसंग की नृत्य नाटिका, बघेली लोकगायन, भक्ति संगीत और कृष्ण जन्म पर आधारित प्रस्तुतियां यहां का आकर्षण रहेंगी।
तराना और गोपाल मंदिर भी होंगे कृष्णमय
4 सितंबर को तराना स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में लोक में भक्ति और भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। इसी दिन उज्जैन के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में शाम 7 बजे भक्ति गायन की प्रस्तुति होगी।
ज्ञान से मित्रता और भक्ति तक—उज्जैन में दिखेगा कृष्ण का पूरा संसार
संस्कृति विभाग के संचालक एनपी नामदेव के अनुसार उज्जैन की धरती भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों से जुड़ी रही है। श्रीकृष्ण पर्व के जरिए इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को उनकी सांस्कृतिक स्मृतियों के साथ जनमानस से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इस बार उज्जैन में कृष्ण की कहानी किसी एक मंच तक सीमित नहीं रहेगी। सांदीपनि आश्रम में ज्ञान, नारायणा में मित्रता, रामलीला चौक में लोकधुन, तराना में भक्ति और गोपाल मंदिर में संगीत के जरिए कृष्ण के अलग-अलग रूप पांच दिनों तक उज्जैन की धरती पर जीवंत होते नजर आएंगे।