न्यूजलाइन डॉट कॉम रिपोर्ट

देश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने वाली याचिका को आज खारिज कर उन सभी भक्तों को निराश कर दिया है जो वीआईपी दर्शन के विरुद्ध बराबरी का दर्जा चाह रहे। दरअसल, यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जहां आज चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ ने सुनवाई कर याचिका को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता को सरकार या प्रशासन के पास जाने का निर्देश दिया।
यह निर्णय करते हुए कोर्ट ने जो टिप्पणी की है, उसे भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस तरह की याचिका दायर करने वाले असली श्रद्धालु नहीं होते हैं, बल्कि उनका इरादा कुछ और होता है। देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि ऐसे विषयों पर नीति बनाना या गाइडलाइंस जारी करना कोर्ट का काम नहीं होता है। दर्पण अवस्थी ने यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी। याचिकाकर्ता अवस्थी की ओर से अभिभाषक विष्णुशंकर जैन ने कहा कि मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के लिए समान नीति होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हो रहा है। वीआईपी स्टेटस के आधार पर श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। अगर कोई श्रद्धालु कलेक्टर की परमिशन से गर्भगृह में जल चढ़ाने जा सकता है तो अन्य श्रद्धालुओं को भी प्रवेश मिलना चाहिए। इससे पहले अवस्थी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन वहां भी याचिका को खारिज कर दिया गया था।
अब कहां जाएं भक्त…?
सुप्रीम कोर्ट ने वीआईपी दर्शन से रोक लगाने से इंकार कर देश के सभी श्रद्धालुओं को निराश कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने कहा है कि इसके लिए सरकार या प्रशासन के पास जाएं लेकिन अगर ऐसा होता तो सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाने की आवश्यकता ही नहीं होती। अब भक्तों को इस मामले में जनमत तैयार कर यह बताना चाहिए कि श्रद्धालु और आम नागरिक क्या चाहते हैं।














