* कई राज खोलने वाली है ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ , संपादकीय बदलाव को लेकर अड़ीं लेखिका
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ प्रकाशन से पहले ही सुर्खियों में आ गई है। किताब को भारत में प्रकाशित करने की जिम्मेदारी संभाल रहे पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अब इससे पीछे हटने का फैसला किया है। वजह बताई जा रही है किताब की कुछ सामग्री में बदलाव को लेकर मतभेद। सूत्रों के मुताबिक, प्रकाशक किताब के कुछ हिस्सों में बदलाव करने और कुछ सामग्री हटाने के पक्ष में था। हालांकि, सोनिया गांधी ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद पेंगुइन इंडिया ने प्रकाशन से हटने का फैसला किया। अब कौन छापेगा सोनिया गांधी की कहानी?
पेंगुइन के पीछे हटने के बाद कई भारतीय प्रकाशक इस किताब को प्रकाशित करने की दौड़ में हैं। खबर है कि हार्पर कॉलिन्स इंडिया किताब के प्रकाशन और वितरण को लेकर समझौते को अंतिम रूप देने के करीब है। किताब की अंतरराष्ट्रीय घोषणा अमेरिका के प्रतिष्ठित प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ ने की थी। यह पेंगुइन रैंडम हाउस की ही एक शाखा है। किताब 10 नवंबर को जारी होने वाली है और इसकी पहली छपाई एक लाख प्रतियों की होगी। 19 साल की सोनिया से शुरू होती है कहानी 544 पन्नों की ‘बिलॉन्गिंग’ सोनिया गांधी के जीवन का बेहद निजी और अहम दस्तावेज बताई जा रही है। कहानी 1965 के कैम्ब्रिज से शुरू होती है, जब 19 साल की सोनिया माइनो पढ़ाई के लिए इंग्लैंड पहुंची थीं। यहीं उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। यह मुलाकात धीरे-धीरे प्यार में बदली और फिर शादी तक पहुंची। इसके बाद सोनिया की जिंदगी भारत से जुड़ गई। भारत आने के बाद उन्होंने भारतीय जीवनशैली और संस्कृति को अपनाया। हिंदी सीखने से लेकर साड़ी पहनने और भारतीय खान-पान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने तक के अनुभव भी किताब में शामिल हैं। इंदिरा गांधी से लेकर गांधी परिवार के मुश्किल दौर तक किताब में सोनिया गांधी के इंदिरा गांधी के साथ रिश्ते, गांधी परिवार के भीतर के अनुभव और परिवार पर आए मुश्किल दौर का भी जिक्र है। संजय गांधी की विमान हादसे में मौत, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या और इसके बाद परिवार के हालात को सोनिया गांधी ने अपने नजरिए से सामने रखा है। किताब में यह भी बताया गया है कि सोनिया की इच्छा नहीं थी कि राजीव गांधी राजनीति में आएं, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें राजनीति में ला खड़ा किया और वह देश के प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी की हत्या का दर्द भी किताब में किताब का सबसे भावनात्मक हिस्सा 1991 में राजीव गांधी की हत्या से जुड़ा बताया जा रहा है। श्रीपेरंबदूर में चुनाव प्रचार के दौरान आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी की जिंदगी किस तरह बदल गई, इसका भी किताब में व्यक्तिगत नजरिए से वर्णन है। राजीव गांधी की मौत के बाद सोनिया ने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। बाद में उन्होंने कांग्रेस की कमान संभाली और लंबे समय तक पार्टी की अध्यक्ष रहीं। उनके राजनीतिक सफर, पार्टी के नेतृत्व और सत्ता के गलियारों में बिताए वर्षों के अनुभव भी किताब का हिस्सा हैं। 2004 का फैसला, जब प्रधानमंत्री बनने से किया इनकार सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित अध्याय 2004 भी किताब में शामिल है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को लोकसभा चुनाव में जीत मिलने के बाद सोनिया गांधी प्रधानमंत्री पद की प्रमुख दावेदार थीं, लेकिन उन्होंने पद स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने और यूपीए सरकार का गठन हुआ। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि सोनिया गांधी की किताब में क्या लिखा है, बल्कि यह भी है कि प्रकाशक को ऐसा क्या बदलना था, जिसे लेखिका ने हटाने से इनकार कर दिया? किताब के 10 नवंबर को आने के साथ इस सवाल का जवाब भी सामने आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन इस नए मोड़ के बाद प्रकाशन में देरी हो सकती है।













