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जी हां, ये कार 1 करोड़ की है और वह भी नई नहीं सेकंड हैंड। महाकाल नगरी उज्जैन में इन दिनों यह पीले रंग की चमचमाती लग्जरी स्पोर्ट कार सड़क पर जब दौड़ती है तो हर कोई एक बार झलक पाने को मुड़ जाता है। जर्मनी की यह महंगी कार उज्जैन के एक युवक ने अपनी पत्नी को खुश करने के लिए गिफ्ट की है।
उज्जैन में यूं तो कई कारें दौड़ती हैं लेकिन पीले रंग की इस रेसिंग कार की बात ही निराली है। इसमें सिर्फ दो लोग ही बैठ पाते हैं और जब इसका गियर लगाया जाता है तो तेज रेसिंग की आवाज़ बरबस सभी का ध्यान खींच लेती है। उज्जैन में पहली बार किसी ने इसे खरीदने की हिम्मत दिखाई है, क्योंकि यह एक लीटर पेट्रोल में केवल तीन या साढ़े तीन किलोमीटर ही चलती है। यानी उज्जैन शहर में अगर इससे घूमना है तो कम से कम 5 हजार रुपए का पेट्रोल डलाना पड़ता है। उज्जैन की सड़कों पर इसे देखना अभी लोगों के लिए आकर्षण और चर्चा का विषय बना हुआ है। कार का एक बटन दबाते ही इसका ऊपर का हिस्सा खुल जाता है और यह रेसिंग कार बन जाती है।
पोर्शे कार का इतिहास
* फोर्डिनेंड पोर्शे ने 1931 में कार बनाने की शुरुआत की थी।
* 1948 में पहली कार (356) बनाई गई थी।
* दुनियाभर में इस कार के फैंस हैं, अमेरिका से थाईलैंड तक।
* पोर्शे का 911 मॉडल सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है, क्योंकि इसने कई रेस जीती हैं।
* इसे रेसिंग विरासत कार के नाम से भी जाना जाता है।
* कहते हैं पोर्शे ने एक छोटे से गैरेज में 52 कार बनाने से शुरुआत की थी।
* पोर्शे का हेडक्वार्टर जर्मनी के श्टुटगार्ड में है।
* सचिन तेंदुलकर के पास भी लाल रंग की पोर्शे 911 कार है।
* तेंदुलकर कुछ समय पहले इस कार के साथ एक स्टेडियम में दिखाई दिए थे।
