विश्व

ईरान पर संकट… भारत ने अपने नागरिकों को तुरंत बुलाया

* तेहरान स्थित दूतावास ने कहा हवाईजहाज या जो भी साधन मिलें, तुरंत ईरान छोड़ें
ईरान में सत्ता के विरुद्ध विरोध को उग्र रूप लेते देख भारत ने अपने नागरिकों को तुरंत स्वदेश बुलाया है। सभी से कहा गया है कि हवाईजहाज या जो भी साधन मिले, उससे तुरंत भारत आएं। इससे संकेत मिल रहा है कि ईरान पर बड़ा संकट मंडरा रहा है और वहां बड़ा उलटफेर हो सकता है। दुनिया भर के नेता इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर ईरान की मौजूदा सरकार गिरती है, तो इसका असर वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजारों पर पड़ेगा।
ईरान में धार्मिक सत्ता के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। सुरक्षा बलों की सख्ती और कई इलाकों में झड़पों के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनती जा रही है। वहां की सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया है। स्थिति को देखते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है कि वे तुरंत ईरान छोड़ दें। दूतावास ने कहा है कि छात्र, तीर्थयात्री, कारोबारी और पर्यटक मौजूद साधनों, खासकर कमर्शियल फ्लाइट्स के जरिए ईरान से निकलें और सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरतें। सभी को सलाह दी है कि विरोध प्रदर्शन या भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें और स्थानीय मीडिया पर नजर बनाए रखें, ताकि हालात से जुड़े ताजा अपडेट मिलते रहें। अनुमान है कि ईरान में 10 से 12 हजार भारतीय हैं। बड़ी संख्या छात्रों की है। मेडिकल और धार्मिक अध्ययन से जुड़े छात्र भी इसमें शामिल हैं। इंटरनेट बंद हो जाने से भारतीयों को लाना आसान नहीं है। कई इलाकों में आवाजाही पर रोक और उड़ानों पर प्रतिबंध लगने के आसार हैं। ईरान का मौजूदा जन आंदोलन 2009 और 2022 के बाद सबसे बड़ा बताया जा रहा है।
ईरान पर क्या है संकट
बीते साल 28 दिसंबर को रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद तेहरान के बाजारों से विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई, जहां व्यापारियों ने आसमान छूती महंगाई के खिलाफ दुकानें बंद कर प्रदर्शन शुरू किया। ये प्रदर्शन सभी 31 प्रांतों में फैल चुका हैं। पिछले दो साल में रियाल अपनी कीमत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा खो चुका है। 2024 में 1 डॉलर की कीमत करीब 5 लाख रियाल थी। जनवरी 2026 तक 1 डॉलर की कीमत 15 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। इस गिरावट ने आम ईरानियों की बचत और खरीदने की ताकत पूरी तरह तोड़ दी है। खाने के तेल, चिकन जैसी जरूरी चीजों की कीमतें रातोंरात बढ़ने से हालात और बिगड़ गए। कई सामान बाजार से गायब हो गए। सरकार द्वारा सस्ती डॉलर व्यवस्था खत्म करने के फैसले ने आग में घी डालने का काम किया। प्रदर्शनकारियों के नारे अब सीधे सत्ता के केंद्र पर हैं- ‘खामेनेई मुर्दाबाद’, ‘तानाशाह का नाश हो’ और रजा पहलवी के नेतृत्व में राजशाही की वापसी जैसे नारे तेहरान, मशहद और अन्य प्रमुख शहरों में खुलेआम लगाए जा रहे हैं।
जटिल राजनीतिक व्यवस्था
* ईरान एक ऐसा देश है जहां की राजनीतिक व्यवस्था को समझना मुश्किल है।
* एक तरफ सर्वोच्च नेता से नियंत्रित अनिर्वाचित संस्थाओं का जाल है तो दूसरी ओर ईरानी मतदाताओं की ओर से चुनी हुई संसद और राष्ट्रपति हैं।
* ये दोनों ही तंत्र एक साथ मिलकर काम करते हैं।
* ईरानी राज व्यवस्था में सर्वोच्च धार्मिक नेता का पद सबसे ताक़तवर माना जाता है।
* सर्वोच्च नेता ईरान की सशस्त्र सेनाओं का प्रधान सेनापति होता है। उनके पास सुरक्षा बलों का नियंत्रण होता है।
* अभी अयातोल्लाह अली ख़ामेनेई सर्वोच्च नेता हैं।
* 1989 में पूर्व सर्वोच्च नेता ख़ुमैनी की मौत के बाद अयातोल्लाह अली ख़ामेनेई सर्वोच्च नेता बने थे।
* सर्वोच्च नेता बनने के बाद से ख़ामेनेई ने सत्ता पर अपनी मज़बूत पकड़ बनाई हुई है। उन्होंने सत्ता-विरोध को कभी उठने नहीं दिया।
* ईरान संविधान के तहत राष्ट्रपति ईरान में दूसरा सबसे ज़्यादा ताक़तवर व्यक्ति होता है।
* अभी वहां हसन रुहानी राष्ट्रपति हैं।
* ईरान में राष्ट्रपति पद के लिए हर चार सालों में चुनाव होता है।
* ईरान में 290 सदस्यों वाली संसद मजलिस को हर चार सालों में आम चुनाव के माध्यम से चुना जाता है।
* 18 जून को ईरानी मतदाताओं ने उदारवादी धार्मिक नेता और राष्ट्रपति हसन रुहानी का उत्तराधिकारी चुनने के लिए मतदान किया है।
* ईरान में गार्डियन काउंसिल सबसे ज़्यादा प्रभावशाली संस्था है, जिसका काम संसद द्वारा पारित सभी क़ानूनों को मंजूरी देना या रोकना है।
* सर्वोच्च नेता की मृत्यु होने पर संस्था एक गुप्त चुनाव आयोजित करती है, जिसमें स्पष्ट बहुमत पाने वाले व्यक्ति को उत्तराधिकारी घोषित किया जाता है।

समाचार को साझा करें :
आप न्यूज और वीडियो आदि इस नंबर पर वाट्सएप कर सकते हैं : 9826170040
प्रमुख समाचार
मुख्‍य पृष्‍ठ
अभी-अभी
महाकाल नगरी
खबर एक नजर
×