पार्षद अचानक पुलिस अफसर के पैरों पर लेट गया, दंडवत कर ये क्या कहा…?

* इंदौर में जलसंकट को लेकर राजनीति गरमाई, सरकार एक्टिव

* सरकार ने पीएचई अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश किए निरस्त
Nejline.com report
भीषण गर्मी के कारण मध्यप्रदेश में जलसंकट गहराने लगा है। सरकार इसको लेकर एक्टिव हो गई है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पीएचई के अधिकारियों और कर्मचारियों सहित पेयजल से जुड़े अमले की छुट्टी निरस्त कर दी है और कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वे पेयजल व्यवस्था की रोज समीक्षा करें। इंदौर में जलसंकट ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी रविवार को एसीपी के पैरों पर गिर पड़े और दंडवत की मुद्रा में कहा सर पानी दे दो, नहीं तो जनता मर जाएगी। हालांकि राजनीति के चक्कर में पार्षद ये भूल गए कि पानी देना पीएचई का काम है न कि पुलिस का। पुलिस अपराधियों को जरूर अपने अंदाज में पानी पिला सकती है।
प्रदेश में लगातार गर्मी के तीखे तेवर से पेयजल संकट खड़ा हो रहा है। इसको देखते हुए सरकार भी एक्टिव हो गई है। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मीटिंग ली और पेयजल व्यवस्था के लिए हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीएचई और पेयजल से जुड़े अधिकारी और कर्मचारियों की छुट्टियां निरस्त की जाती है ताकि आम लोग पेयजल को लेकर परेशान न हों। उन्होंने सेंट्रल कंट्रोल रूम भी बनाने के निर्देश दिए। उज्जैन में शनिवार को ही महापौर मुकेश टटवाल, निगम सभापति कलावती यादव और विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने गंभीर डेम का निरीक्षण किया और कहा शहर में रोज नियमित जल प्रदाय किया जाएगा।
उज्जैन के समीप इंदौर में पेयजल की समस्या ज्यादा आ रही है। कई क्षेत्रों में पानी की किल्लत हो रही है। इसको लेकर कांग्रेस ने राजनीतिक हमला बोलना शुरू कर दिया है। रविवार को वार्ड 64 और 75 में जलसंकट को लेकर कांग्रेस ने हल्ला बोल दिया। पार्षद कुणाल सोलंकी सहित कई लोग सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन किया। इसमें कांग्रेस समर्थित ज्यादा थे। पार्षद सोलंकी ने प्रदर्शन के दौरान एक एसीपी के पैर पकड़ लिए और कहा सर जनता को पानी दिला दो, सोलंकी ने दंडवत करते हुए ये बात दोहराई। दरअसल, पुलिस प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल कर रही थी, इसी दौरान पार्षद सोलंकी ने जलसंकट को राजनीतिक तूल देने का पूरा प्रयास किया।