- अब रामलीला मैदान-बुराड़ी और सीबीडी में उठेगी विरोध की आवाज!
- देश की राजधानी दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के ठिकाने बदले
करीब साढ़े तीन दशक से देशभर के आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों की पहचान रहे दिल्ली के जंतर-मंतर से अब प्रदर्शन ही छूमंतर हो जाएंगे। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया है। अब प्रदर्शनकारियों को अपनी आवाज उठाने के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान का रुख करना होगा। सरकार के इस फैसले ने विरोध प्रदर्शनों की जगह को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर विरोध प्रदर्शनों के लिए इन तीन स्थानों को निर्धारित किया गया है। इन स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अलग से जारी की जाएगी। नए आदेश से 28 अप्रैल 2022 को जारी पुराने आदेश में आंशिक संशोधन किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत विरोध प्रदर्शनों का केंद्र अब संसद और केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र के आसपास नहीं रहेगा। रामलीला मैदान जंतर-मंतर से करीब तीन किलोमीटर, सीबीडी मैदान लगभग 13 किलोमीटर और बुराड़ी मैदान करीब 21 किलोमीटर दूर है। यानी जंतर-मंतर की जगह लेने वाले दो मैदान प्रदर्शनकारियों को राजधानी के दूसरे हिस्सों में ले जाएंगे।
रामलीला मैदान हालांकि आंदोलनों की पुरानी जमीन रहा है। वर्ष 1975 में जयप्रकाश नारायण की रैली से लेकर 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन तक, इस मैदान ने कई बड़े जन आंदोलनों को देखा है। बुराड़ी मैदान भी 2020 के किसान आंदोलन के दौरान चर्चा में आया था, जब आंदोलनकारियों से वहां जाने को कहा गया था।
सीजेपी ने फैसले को बताया मौलिक अधिकार पर हमला
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंची थी। पार्टी ने इस व्यवस्था को अस्वीकार्य बताते हुए कहा है कि यह लोगों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और विरोध प्रदर्शन करने के मौलिक अधिकार पर हमला है।
सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को रद्द करने की मांग कर रही है। दो अक्टूबर से जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी निर्धारित स्थान पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने की मांग उठाई गई थी।
जंतर-मंतर पर हाल के दिनों में राजनीतिक और छात्र संगठनों के आंदोलनों को लेकर हलचल रही है। पेपर लीक मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग को लेकर यहां बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। वहीं, 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें और हिंसा भी हुई थी।
सीजेपी के ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले आंदोलन और वामपंथी छात्र संगठनों तथा विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ओर से दो से 10 अक्टूबर तक आंदोलन चलाने की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पूरी तरह रोक दिए जाने की बात सामने आई थी। अब पुलिस के नए आदेश ने इस बदलाव को औपचारिक रूप दे दिया है।
जंतर-मंतर लंबे समय तक आम नागरिकों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लिए अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने का प्रमुख मंच रहा है। ऐसे में सवाल यही है कि नए निर्धारित मैदानों पर जाने से प्रदर्शनकारियों की आवाज उतनी ही आसानी से सत्ता के गलियारों तक पहुंच पाएगी या नहीं।












