खजुराहो: भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा का सिर मिला

  • सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था प्रतिमा की मरम्मत का मामला
  • एएसआई के भंडार में मिला सिर
  • अब एएसआई विशेषज्ञों से कराएगा जांच

मध्यप्रदेश के खजुराहो स्थित 11वीं सदी के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा का गायब सिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को मिल गया है। प्रतिमा की मरम्मत को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अब एएसआई विशेषज्ञों से मिले सिर की जांच कराने के बाद उसे प्रतिमा से दोबारा जोड़ने की योजना बना रहा है। इस घटनाक्रम के साथ ही उज्जैन की वैश्य टेकरी में पुरातात्विक खुदाई की तैयारी भी चर्चा में है, जहां विशाल बौद्ध स्तूप होने की संभावना जताई गई है
एएसआई के महानिदेशक यदुबीर सिंह रावत ने साक्षात्कार में बताया कि जवारी मंदिर की प्रतिमा का सिर एएसआई के भंडार में रखा मिला। उनके अनुसार, भोपाल में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सिलसिले में दौरे के दौरान उन्हें इसकी जानकारी मिली। अधिकारियों ने आशंका जताई कि संभवतः सिर तोड़कर चोरी करने की कोशिश की गई थी, लेकिन प्रयास सफल नहीं हुआ। फिलहाल विशेषज्ञों से सिर की जांच कराई जा रही है। इसके बाद उसे प्रतिमा पर फिर से लगाने की योजना है।
जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की करीब सात फीट ऊंची प्रतिमा का सिर खंडित होने का मामला पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अधिवक्ता राकेश दलाल ने प्रतिमा की मरम्मत, उसे बदलने अथवा दोबारा बनाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी। सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की टिप्पणी को लेकर भी विवाद हुआ था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया।
एएसआई महानिदेशक रावत ने बताया कि पुरातात्विक खुदाई में देरी रोकने के लिए कार्यों को तीन साल में पूरा करने की समय-सीमा तय की गई है। इसके अलावा अधिकांश संरक्षण परियोजनाओं की मंजूरी की प्रक्रिया को घटाकर 15 से 20 दिन करने की व्यवस्था की गई है।
वैश्य टेकरी में विशाल बौद्ध स्तूप की संभावना
उज्जैन स्थित वैश्य टेकरी में शुरुआती पुरातात्विक खुदाई की योजना भी बनाई जा रही है। रावत के अनुसार, यहां बौद्ध स्तूप होने की संभावना है, जिसका आकार सांची के स्तूप से भी बड़ा हो सकता है। हालांकि, इसकी वास्तविक संरचना, आकार और ऐतिहासिक महत्त्व का पता खुदाई के बाद ही चल सकेगा। यदि यहां महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष मिलते हैं, तो उज्जैन के प्राचीन इतिहास और बौद्ध विरासत से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं।