गंभीर डेम और गऊघाट प्लांट तक पहुंचा नर्मदा का पानी

  • उज्जैन को मिली राहत, पेयजल व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गुरुवार से शुरू हुई जलापूर्ति
  • सिंहस्थ से पहले क्षिप्रा को प्रदूषण से बचाने की तैयारी
  • आयुर्वेदिक कॉलेज के पीछे मंगलनाथ रोड पर 82 करोड़ से बन रहा एसटीपी

15 अक्टूबर गुरुवार

उज्जैन शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर अच्छी खबर है। गंभीर डेम स्थित इंटकवेल और गऊघाट जल शोधन संयंत्र तक गुरुवार से मां नर्मदा का पानी पहुंचना शुरू हो गया है। इससे उज्जैन में पेयजल व्यवस्था को मजबूती मिलने और शहरवासियों को नियमित जलापूर्ति बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर नर्मदा का जल गंभीर डेम और गऊघाट प्लांट तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। नगर निगम का कहना है कि शहर में पेयजल आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के लिए जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। गंभीर डेम में केवल 600 एमसीएफटी के आसपास ही पानी बचा है। इसको लेकर चिंता उत्पन्न हो गई थी।
पेयजल व्यवस्था को मिलेगा सहारा
शहर की आबादी की जरूरतों के अनुरूप नियमित पेयजल आपूर्ति बनाए रखना नगर निगम के लिए महत्वपूर्ण है। गंभीर डेम स्थित इंटकवेल और गऊघाट प्लांट तक नर्मदा का पानी पहुंचने से जल प्रबंधन में मदद मिलेगी। अब इस व्यवस्था के जरिए शहर में पानी की उपलब्धता और वितरण को सुचारू बनाए रखने पर जोर रहेगा।
जल प्रबंधन पर निगम का जोर
नगर निगम द्वारा शहर की पेयजल व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। नर्मदा का पानी पहुंचना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, इससे जलापूर्ति की मात्रा या समय में कितना बदलाव आएगा, यह संबंधित विभाग की आगे की जानकारी से स्पष्ट होगा।
82 करोड़ से बनेगा 22 एमएलडी का एसटीपी

सिंहस्थ-2028 में क्षिप्रा नदी में स्वच्छ जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए उज्जैन में सीवेज प्रबंधन की बड़ी परियोजना पर काम चल रहा है। नमामि गंगे परियोजना के तहत 82 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक धन्वंतरि कॉलेज के पीछे 22 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहर के दूषित पानी को उपचारित कर नदी में मिलने से रोकना है। नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने निर्माणाधीन एसटीपी और सीवेज पंपिंग स्टेशन का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। क्षिप्रा नदी के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पीलिया खाल और भैरवगढ़ नाले से निकलने वाले दूषित पानी का उपचार किया जाएगा। परियोजना के तहत सीवेज पंपिंग स्टेशन, मुख्य पाइपलाइन और जल उपचार से जुड़ी व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। इनसे दूषित पानी को उपचार संयंत्र तक पहुंचाकर शोधन के बाद निर्धारित व्यवस्था के अनुसार आगे छोड़ा जाएगा।
22 एमएलडी क्षमता के दो प्रमुख पंपिंग स्टेशन
परियोजना के तहत धन्वंतरि कॉलेज के पीछे 22 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाया जा रहा है। इसके साथ सीवेज पंपिंग स्टेशन और 600 मिलीमीटर व्यास की डक्टाइल आयरन (डीआई) पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसमें 920 मीटर लंबी सीवेज पंपिंग मुख्य पाइपलाइन और 2,000 मीटर लंबी सीवेज जल उपचार पाइपलाइन का निर्माण शामिल है।
मंगलनाथ मंदिर के सामने 22 एमएलडी क्षमता का आईएनडी पंपिंग स्टेशन तथा भैरवगढ़ नाले पर 2.38 एमएलडी क्षमता का अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र स्थापित करने की भी योजना है। इसके साथ 200 मिलीमीटर व्यास की 500 मीटर लंबी सीवेज पंपिंग मुख्य पाइपलाइन और 1,500 मीटर लंबी सीवेज जल उपचार पाइपलाइन बिछाई जाएगी। परियोजना के एसटीपी और ईटीपी संबंधी कार्य अगस्त 2027 तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।
सिंहस्थ-2028 से पहले इस परियोजना को पूरा करना महत्वपूर्ण है। इससे क्षिप्रा में दूषित जल का प्रवाह रोकने और नदी की स्वच्छता बनाए रखने के प्रयासों को आधार मिलेगा। हालांकि, इसका वास्तविक असर संयंत्रों के समय पर चालू होने और उनके प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगा।