15 अक्टूबर, गुरुवार
विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन में वर्ष 2021 में प्रोफेसरों के बीच हुई मारपीट के विवाद से सुर्खियों में आए प्रो. दीनदयाल बेदिया को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल का नया कुलगुरु नियुक्त किया गया है। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने उनकी नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। प्रो. बेदिया वर्तमान में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान में व्यवसाय प्रबंध के प्रोफेसर हैं।
राज्यपाल ने प्रो. बेदिया को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से चार वर्ष अथवा 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, के लिए कुलगुरु नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही वर्ष 2021 में विक्रम विश्वविद्यालय में हुआ वह विवाद भी फिर चर्चा में आ गया है, जिसमें तत्कालीन एमबीए विभागाध्यक्ष प्रो. बेदिया और प्रो. कामरान सुल्तान के बीच कुलसचिव के कक्ष में मारपीट हुई थी।
फरवरी 2021 में विक्रम विश्वविद्यालय में प्रो. दीनदयाल बेदिया और प्रो. कामरान सुल्तान के बीच कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया था। विवाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव के कक्ष में शुरू हुआ और देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई होने लगी। उस समय सामने आई जानकारी के अनुसार, दोनों के बीच लात-घूंसे चले और कपड़े तक फट गए थे। प्रो. कामरान सुल्तान के चेहरे से खून बहने तथा डॉ. बेदिया के कपड़े फटने की जानकारी भी सामने आई थी।
घटना के बाद दोनों प्रोफेसरों को तत्कालीन कुलपति डॉ. अखिलेश कुमार पांडेय के सामने पेश हुए थे। कुलपति ने दोनों को फटकार लगाई थी और घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए खुद को शर्मिंदा बताया था। मामले में दोनों को नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें एक महीने तक प्रतिदिन कुलपति अथवा कुलसचिव के कार्यालय में जाकर हस्ताक्षर करने के निर्देश दिए गए थे।
प्रो. कामरान ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांगी थी इच्छामृत्यु
इस विवाद ने उस समय व्यापक सुर्खियां बटोरी थीं। प्रो. कामरान सुल्तान ने घटना के बाद राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग की थी। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया था कि डॉ. बेदिया उन्हें विश्वविद्यालय में दिव्यांगता को लेकर अपमानित करते थे। उनके अनुसार, घटना से उनके आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंची और इसका असर उनके परिवार पर भी पड़ा।
जानिए पांच साल पहले यह था विवाद
- विभागाध्यक्ष पद को लेकर दोनों के बीच मतभेद बने हुए थे।
- दोनों प्रोफेसरों के बीच विवाद की वजह एलएलएम पाठ्यक्रम में प्रवेश और विभागाध्यक्ष पद को लेकर मतभेद बताए गए थे।
- प्रो. कामरान सुल्तान विश्वविद्यालय से एलएलएम की पढ़ाई करना चाहते थे, जबकि तत्कालीन एमबीए विभागाध्यक्ष डॉ. बेदिया को उनके प्रवेश पर आपत्ति बताई गई थी।
- प्रो. कामरान सुल्तान पहले एमबीए विभाग के प्रमुख रह चुके थे। बाद में उन्हें इस पद से हटाकर डॉ. बेदिया को विभागाध्यक्ष बनाया गया था।











