उज्जैन के गयाकोटा पर पितरों के तर्पण के लिए 1 किमी लंबी कतार

* रात 2 बजे से जुटे श्रद्धालु, 16 चरण पादुकाओं पर किया दुग्ध अभिषेक

उज्जैन। पितरों की मुक्ति और तर्पण की आस्था ने श्राद्ध पक्ष की चौदस पर उज्जैन के गया कोटा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। आगर रोड स्थित गया कोटा पर रात 2 बजे से ही दुग्ध अभिषेक के लिए कतारें लगनी शुरू हो गईं। देखते ही देखते श्रद्धालुओं की लाइन करीब एक किलोमीटर तक पहुंच गई। बड़ी संख्या में लोग अपने पितरों की मोक्ष कामना के साथ यहां पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठान किए। पंडित दिनेश चंद्र व्यास ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में गया कोटा का विशेष धार्मिक महत्व है। महालय श्राद्ध के दौरान पूर्णिमा से अमावस्या तक श्रद्धालु अलग-अलग तिथियों पर अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने विष्णु स्वरूप में यहां 16 चरण पादुकाओं की स्थापना की थी। संदीपनी ऋषि के पुत्रों के मोक्ष से जुड़ी मान्यताओं के कारण गया कोटा को पितृ तर्पण और मोक्ष का महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है।
दूध, जल, तुलसी और कमल अर्पित कर की सुख-समृद्धि की कामना
श्रद्धालु 16 चरण पादुकाओं पर दूध से अभिषेक करने के साथ जल, तुलसी पत्र, श्वेत पत्र और कमल अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन अनुष्ठानों से पितरों को जलांजलि अर्पित होती है और परिवार की सुख-समृद्धि, व्यवसाय में उन्नति तथा धन-धान्य की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
चौदस पर देर रात से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। सुबह तक लंबी कतारों और पूजा-अर्चना के बीच गया कोटा क्षेत्र में पितरों के प्रति श्रद्धा और धार्मिक आस्था का विशेष नजारा दिखाई दिया।