- उज्जैन के अर्जुन सोलंकी ने बढ़ाया मान 27 देशों के खिलाड़ियों के बीच दिखाई प्रतिभा
- 200 मीटर बैकस्ट्रोक में हासिल किया तीसरा स्थान; मां ने बचपन में सिखाए तैराकी के गुर उज्जैन।
नदी किनारे तैरना सीखने वाले उज्जैन के अर्जुन सिंह सोलंकी ने अब अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। बेंगलुरु में 4 से 10 अक्टूबर तक आयोजित द्वितीय एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप में अर्जुन ने 200 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर उज्जैन का नाम रोशन किया। 27 देशों के खिलाड़ियों की भागीदारी वाली इस प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल करने तक का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और पारिवारिक प्रोत्साहन की कहानी है। खास बात यह है कि अर्जुन को तैराकी के शुरुआती गुर उनकी मां ने सिखाए थे। बचपन में नदी किनारे शुरू हुआ यह सफर आज अंतरराष्ट्रीय पदक तक पहुंच गया है। 27 देशों के खिलाड़ियों के बीच जीता कांस्य पदक बेंगलुरु में आयोजित एशियन मास्टर्स स्विमिंग चैंपियनशिप में अर्जुन ने 25 से 29 वर्ष आयु वर्ग की 200 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में तीसरा स्थान हासिल किया। इस मुकाबले में श्रीलंका के खिलाड़ी ने पहला और भारत के एक अन्य खिलाड़ी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। अर्जुन ने कांस्य पदक अपने नाम किया। मां ने सिखाई तैराकी, वहीं से शुरू हुआ सफर अर्जुन की सफलता की कहानी में उनकी मां की भूमिका अहम है। घर नदी के पास होने के कारण बचपन में उनकी मां ने उन्हें तैरना सिखाया। मां स्वयं स्कूल गेम्स में राज्य स्तर की खिलाड़ी रह चुकी हैं। खेल के प्रति उनका अनुभव और प्रोत्साहन अर्जुन के लिए शुरुआती प्रेरणा बना। बचपन में शौक के रूप में शुरू हुई तैराकी धीरे-धीरे उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। 2009 में शुरू की नियमित तैयारी, 2011 में पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता अर्जुन ने वर्ष 2009 में तैराकी की व्यवस्थित तैयारी शुरू की। नियमित अभ्यास और अनुशासन के साथ उन्होंने अपनी तकनीक और प्रदर्शन को बेहतर बनाया। वर्ष 2011 में पहली बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने अभ्यास जारी रखा और विभिन्न खेल स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा साबित की। गोवा नेशनल गेम्स में भी जीत चुके हैं रजत पदक अर्जुन की उपलब्धियां केवल तैराकी तक सीमित नहीं हैं। वर्ष 2023 में गोवा में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने रजत पदक जीता था। इसके अलावा ट्रायथलॉन और मॉडर्न पेंटाथलॉन में भी पदक हासिल किए हैं। ट्रायथलॉन में तैराकी, साइकिलिंग और दौड़ शामिल होती हैं, जबकि मॉडर्न पेंटाथलॉन में विभिन्न खेल कौशलों की परीक्षा होती है। इन खेलों में अर्जुन की उपलब्धियां उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती हैं। प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और अभ्यास से मिली सफलता अर्जुन ने अपनी सफलता का श्रेय प्रशिक्षक देवीदास रामचंदानी (गोलू) और अमित यादव के मार्गदर्शन तथा नियमित अभ्यास को दिया। उनके अनुसार, अनुशासन, निरंतर मेहनत और प्रशिक्षकों के सहयोग ने इस उपलब्धि तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रतियोगिता में उज्जैन के दिलीप जोशी, अविनाश टावर, सोमेश शर्मा और सुभाष गुप्ता ने भी भाग लिया। युवाओं के लिए प्रेरणा बनी अर्जुन की उपलब्धि उज्जैन में नदी किनारे तैराकी सीखकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतने तक अर्जुन सिंह सोलंकी का सफर बताता है कि निरंतर अभ्यास और सही मार्गदर्शन से खेल में आगे बढ़ा जा सकता है। उनकी उपलब्धि शहर के खेल जगत के लिए गौरव का विषय है और उन युवाओं के लिए प्रेरणा भी, जो खेलों में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।











