* महाकाल मंदिर में उमा सांझी महोत्सव का समापन
* वर्ष में एक बार निकलने वाली सवारी के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में उमा सांझी महोत्सव के समापन पर सोमवार को वर्ष में एक बार निकलने वाली श्री उमा माता की सवारी राजसी ठाठ-बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकली। शाम 4 बजे मंदिर से शुरू हुई सवारी में चांदी की प्रतिमा में विराजित उमा माता के दर्शन के लिए मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालु खड़े रहे। परंपरा, आस्था और धार्मिक उल्लास के बीच सवारी निर्धारित मार्गों से होती हुई शिप्रा तट पहुंची, जहां जवारे और संजा का विसर्जन एवं पूजन किया गया।

अश्विन शुक्ल द्वितीया यानी चंद्र दर्शन के अवसर पर परंपरा के अनुसार उमा माता की सवारी निकाली गई। सवारी रवाना होने से पहले मंदिर के सभामंडप में पूजन किया गया। इसके बाद उमा माता की पालकी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। पालकी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची तो सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने माता को सलामी दी। इसके बाद सवारी ने नगर भ्रमण शुरू किया। पालकी में उमा माता की रजत प्रतिमा विराजित थी। साथ ही डोल रथ पर गरुड़ पर विराजित माता की पीतल की प्रतिमा और भगवान महेश भी शामिल रहे। मंदिर से प्रारंभ होकर सवारी महाकाल चौराहा, महाकाल घाटी, तोपखाना, दौलतगंज चौराहा, नई सड़क, कंठाल, सराफा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कार्तिक चौक, मोढ़ की धर्मशाला और रामानुजकोट होते हुए शिप्रा तट पहुंची। शिप्रा तट पर पूजन के साथ जवारे और संजा का विसर्जन किया गया। धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद सवारी कहारवाड़ी, बक्षी बाजार और महाकाल रोड होते हुए वापस श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।
ƒ6 से 12 अक्टूबर तक चले उमा सांझी महोत्सव के समापन पर निकली इस वार्षिक सवारी ने उज्जैन की धार्मिक परंपराओं और सांझी उत्सव की सांस्कृतिक विरासत को फिर से जीवंत किया।











