वर्तमान एंट्री वीआईपी होगी, मेन एंट्री अब ओखलेश्वर रोड तरफ से होगी, डेढ़ हेक्टेयर जमीन पर माता मंदिर लोक होगा विकसित

मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन स्थित गढ़कालिका माता भक्तों के लिए अच्छी खबर है। वह यह कि मंदिर के आसपास 18.50 करोड़ रुपयों से गढ़कालिका लोक विकसित होने जा रहा है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। मंदिर के सामने रोड का चौड़ीकरण हो रहा है और मंदिर के एंट्री गेट भी बदल जाएंगे। मौजूदा एंट्री आने वाले समय में वीआईपी एंट्री होगी और आम।लोगों का प्रवेश ओखलेश्वर रोड साइड से पीछे की ओर से होगा।
गढ़कालिका लोक विकसित करने के लिए उज्जैन विकास प्राधिकरण ने टेंडर लगा दिया है और तकनीकी बिड खुलना बाकी है। इसके बाद एजेंसी तय की जाएगी। लोक विकसित करने के लिए प्लान तैयार कर लिया गया है जल्द ही इसे जमीन पर उतारा जाएगा। करीब डेढ़ हेक्टेयर जमीन पर ये लोक बनकर तैयार होगा। मंदिर के सामने रोड भी चौड़े हो जाएंगे।
आम लोगों का प्रवेश अब पीछे की ओर से होगा

अभी मंदिर में प्रवेश का जो द्वार है वह मुख्य रोड पर है। इसे लोक विकसित होने पर वीआईपी एंट्री बना दिया जाएगा।इसी के सामने वीआईपी पार्किंग होगी। आम लोगों की एंट्री ओखलेश्वर रोड से पश्चिम की ओर करीब 9 मीटर की दूरी पर होगी जहां ज़िगजेग के साथ मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। मंदिर का मुख्य द्वार भी आकर्षक बनाया जाएगा। लोक विकसित होने पर इसका नज़ारा ही बदल जाएगा। गढ़कालिका मंदिर शहर की आस्था का बड़ा केंद्र है। अगली नवरात्रि तक प्रोजेक्ट जमीन पर उतरने की संभावना है।
महाकवि कालिदास ने की थी आराधना
* यह 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है, जहाँ माता सती का ऊपरी होंठ गिरा था।
* मान्यता है कि कालिदास ने इसी मंदिर में माँ कालिका की आराधना की थी, जिसके बाद उन्हें दिव्य ज्ञान और प्रतिभा की प्राप्ति हुई थी। अभा कालिदास समारोह का आरंभ इसी स्थान पर पूजा अर्चना से होता है।
* इस मंदिर का जीर्णोद्धार 7वीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन ने करवाया था और वर्तमान स्वरूप का निर्माण बाद में ग्वालियर के महाराजा द्वारा कराया गया था।
* यह स्थान तांत्रिकों और साधना करने वालों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
* मंदिर रोजाना सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है।











