खूबसूरत चेहरे के पीछे बदसूरत धोखेबाज़ चेहरा, ये है नेहा पच्चीसिया…

एयर होस्टेस से डीएसपी बनीं नेहा सस्पेंड, 1 करोड़ की जमीन 18.20 लाख में खरीदने का आरोप
कभी एयर होस्टेस की नौकरी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालीं और एमपीपीएससी में 20वीं रैंक हासिल कर डीएसपी बनीं कटनी की चर्चित सीएसपी नेहा पच्चीसिया अब गंभीर आरोपों के चलते निलंबित हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। उनके साथ करीब आधा दर्जन पुलिसकर्मियों पर भी निलंबन की गाज गिरी है।
नेहा पच्चीसिया पर हत्या के मामले में जांच में लापरवाही, आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिलने देने और इसी मामले से जुड़े आरोपियों की बेशकीमती जमीन कथित तौर पर बेहद कम कीमत में अपने करीबी के नाम खरीदवाने जैसे गंभीर आरोप हैं। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि करीब एक करोड़ रुपये कीमत की बताई जा रही जमीन का सौदा महज 18.20 लाख रुपये में कराया गया।
मामले में एफआईआर दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री के निर्देश पर निलंबन की कार्रवाई ने पूरे पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी है और खूबसूरत चेहरे के पीछे छिपे बदसूरत धोखेबाज़ चेहरे के किस्से सुर्खियों में हैं।
हत्या की जांच में चूक से शुरू हुई कहानी
पूरा मामला कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज हत्या के एक प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि हत्या के मामले में निर्धारित समय सीमा के भीतर चालान न्यायालय में पेश नहीं किया गया। इसके चलते मुख्य आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिल गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। इसी के बाद जांच आगे बढ़ी तो मामला सिर्फ विवेचना में लापरवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन के एक कथित सौदे तक पहुंच गया।
जांच में कुठला थाना क्षेत्र के खसरा नंबर 2618/1 की बेशकीमती जमीन का मामला सामने आया। शिकायतकर्ता आकाश उर्फ रमेश लोधी का आरोप है कि उनके पिता रमेश लोधी पर दबाव बनाकर ग्राम कन्हवारा स्थित जमीन की रजिस्ट्री 15 अप्रैल 2026 को मारूफ अहमद हनफी के नाम करा दी गई। आरोप है कि जमीन का वास्तविक सौदा करीब एक करोड़ रुपये में तय हुआ था, लेकिन रजिस्ट्री महज 18.20 लाख रुपये में करा दी गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि पुलिसिया तंत्र और पद के प्रभाव का कथित इस्तेमाल कर जमीन के सौदे को अंजाम दिया गया।
खरीदार के खाते में थे चंद हजार, फिर कहां से आए लाखों?
मामले की जांच में एक और सवाल सामने आया। जिस मारूफ अहमद हनफी के नाम जमीन खरीदी गई, उसके बैंक खाते में जमीन खरीदने से पहले कथित तौर पर महज कुछ हजार रुपये ही थे।
जांच में आरोप है कि इसके बाद क्षितिज राज बारापात्रे के माध्यम से उसके खाते में रकम ट्रांसफर की गई। इसी रकम के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। यहीं से जांच अधिकारियों के सामने सवाल खड़ा हुआ कि जब खरीदार के खाते में जमीन खरीदने के लिए पर्याप्त रकम नहीं थी, तो अचानक लाखों रुपये कहां से आए और इस पूरे लेन-देन के पीछे कौन था? शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जबलपुर रेंज के आईजी प्रमोद कुमार वर्मा ने जांच की जिम्मेदारी जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंपी। जांच अधिकारी ने सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए और अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी। इसके बाद कटनी के कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस के अनुसार, उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 61, 198, 199(बी), 307 और 318 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
सीएम ने कहा- पद का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं
मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचा तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को नेहा पच्चीसिया के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, दबाव या पद के दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नेहा पच्चीसिया के साथ दो सब-इंस्पेक्टर, सीएसपी के रीडर और गनमैन समेत करीब आधा दर्जन पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है।
पहले भी 30 हजार की कथित वसूली का आरोप
नेहा पच्चीसिया का नाम इससे पहले जुलाई में भी विवादों में आया था। एक ट्रांसपोर्टर ने वाहन चेकिंग के दौरान उनसे जुड़े पुलिस अमले पर 30 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया था।
शिकायत के बाद उनके चालक को निलंबित कर दिया गया था और सीएसपी के अधिकार क्षेत्र से तीन थानों का प्रभार वापस ले लिया गया था। हालांकि, इस मामले में शिकायतकर्ता के बाद में अपने बयान से पीछे हटने की खबर भी सामने आई थी। इसलिए उस प्रकरण के आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता।
कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची थीं सीएसपी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद नेहा पच्चीसिया ने हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यक्षेत्र में कमी किए जाने को चुनौती देते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आरोप लगाए थे। हालांकि, हाईकोर्ट से उन्हें तत्काल कोई राहत नहीं मिली।
अब जमीन सौदे और हत्या के मामले में एफआईआर के बाद निलंबन की कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।

नेहा पच्चीसी

राजगढ़ जिले के पचोर तहसील के छोटे से गांव के शिक्षक परिवार से आने वाली नेहा पच्चीसिया चार बहनों में सबसे बड़ी हैं। उनके पिता शिक्षक और मां गृहणी हैं। डीएसपी बनने से पहले वह एयर होस्टेस थीं और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी काम कर चुकी हैं।
उन्होंने नौकरी छोड़कर पीएससी की तैयारी शुरू की। वर्ष 2012 से 2016 तक लगातार प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाएं दीं। वर्ष 2016 में उनका एक साथ चार परीक्षाओं में चयन हुआ और एमपीपीएससी में 20वीं रैंक हासिल की।
डीएसपी बनने के बाद कोरोना काल में कानून-व्यवस्था संभालने के लिए उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सम्मान भी मिला था।
लेकिन जिस अधिकारी का सफर एयर होस्टेस से डीएसपी और एमपीपीएससी की 20वीं रैंक तक पहुंचने की प्रेरक कहानी था, वही कहानी अब एफआईआर, जमीन सौदे, हत्या की जांच में लापरवाही और निलंबन के गंभीर मोड़ पर आ खड़ी हुई है।
अब जांच में यह तय होना बाकी है कि जमीन सौदे और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों में वास्तविक भूमिका किसकी थी और एक करोड़ रुपये की बताई जा रही जमीन महज 18.20 लाख रुपये में कैसे पहुंची